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  • समाधिपाद सूत्र– ४७

    निर्विचारवैशारद्येऽध्यात्मप्रसाद: । निर्विचारवैशारद्ये= निर्विचार समाधि अत्यन्त निर्मल होने पर {योगी को}; आध्यात्मप्रसाद:= आध्यात्मप्रसाद प्राप्त होता है । अनुवाद– निर्विचार समाधि…

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  • मुरली की वो तान

    विधा -कविताश्रेणी – प्रेमरचनाकार -कौशल तेरी बांसुरी जब बजती है न,तो मेरी साँसें भी रुक-रुक कर चलने लगती हैं,जैसे कोई…

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  • पहचान

    पहचान बनाने को श्रम का कुछ दान सदा करना होगा, संशय भ्रम अरु अहंकार के ऊहापोह से बचना होगा।। जिनके…

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  • जीवन – अनुभव

    वक़्त के साथ बहुत कुछ बदलते देखा है ,हालातों के साथ लोगों को बदलते देखा है । कल तक जिनको…

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  • सन्नाटा सा लगता है

    नदी का किनारा भी अब वीराना सा लगता है,बहती रेत में हर छोर बहाना सा लगता है। डर की लहरें…

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  • मोक्ष की खोज

    रात गहरा चुकी थी। गाँव की पगडंडी पर दूर कहीं झींगुरों की आवाज़ें घुल रही थीं। हवा में मिट्टी की…

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  • भावपल्लवन

    श्लोक:-*संगच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम्। **देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते।। *(ऋग्वेद — मण्डल 10, सूक्त 191, मंत्र…

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  • यूॅं ही चलता जा रहा हूॅं

    यूॅं ही चलता चला जा रहा हूॅं ,न मंजिल कोई न है ठिकाना ।ऊपरवाले को ही है समझना ,कहाॅं है…

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  • सर्दियों की मुंगफलियां

    है शिशिर, अपने यौवन परधुंध में लिपटा, चारों ओर।हिम आच्छादित हुए शिखरबढ़ता जाता, ठंड का प्रकोप। ठिठुरन दिन-ब-दिन बढ़ती जातीगुनगुनी…

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  • प्रसन्नता से जीना सीखो

    ” जिंदगी को प्रसन्नता से जीना सीखोकलियों से तुम जीना सीखोजीवन में फूल खिलाना सीखोसुख-दु:ख में भी मुस्कुराना सीखो”मनुष्य एक…

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