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  • गांव

    देश की आत्मा है हमारे गांव। कठिनाइयों के समय ममता की छांव है यह गांव।कर्मठता का प्रतीक है गांव।खेत खलिहानों…

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  • माशूक दिसंबर

    साथ अपने वो गुलाबी ठंड की सौगात लाया है,साल भर का बिछडा़ कोई गोया लौट आया है! गुनगुनी धूप उसके…

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  • सुहानी सुबह

    तिमिरता को चीरते हुए,सुंदर नव भोर हुआ ।नई तरंगें लिए नव उमंगों ,का अंजोर हुआ।कोई परीक्षा की तैयारी ,में जुटा…

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  • समाधि पाद सूत्र– ४८

    ऋतम्भरा तत्र प्रज्ञा । तत्र= उस समय {योगी की}; प्रज्ञा= बुद्धि; ऋतम्भरा= ऋतम्भरा होती है । अनुवाद– उस समय योगी…

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  • समाधिपाद सूत्र– ४७

    निर्विचारवैशारद्येऽध्यात्मप्रसाद: । निर्विचारवैशारद्ये= निर्विचार समाधि अत्यन्त निर्मल होने पर {योगी को}; आध्यात्मप्रसाद:= आध्यात्मप्रसाद प्राप्त होता है । अनुवाद– निर्विचार समाधि…

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  • मुरली की वो तान

    विधा -कविताश्रेणी – प्रेमरचनाकार -कौशल तेरी बांसुरी जब बजती है न,तो मेरी साँसें भी रुक-रुक कर चलने लगती हैं,जैसे कोई…

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  • पहचान

    पहचान बनाने को श्रम का कुछ दान सदा करना होगा, संशय भ्रम अरु अहंकार के ऊहापोह से बचना होगा।। जिनके…

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  • जीवन – अनुभव

    वक़्त के साथ बहुत कुछ बदलते देखा है ,हालातों के साथ लोगों को बदलते देखा है । कल तक जिनको…

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  • सन्नाटा सा लगता है

    नदी का किनारा भी अब वीराना सा लगता है,बहती रेत में हर छोर बहाना सा लगता है। डर की लहरें…

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  • मोक्ष की खोज

    रात गहरा चुकी थी। गाँव की पगडंडी पर दूर कहीं झींगुरों की आवाज़ें घुल रही थीं। हवा में मिट्टी की…

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