Vijay Kumar
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साहित्य
जीवन कोई उत्सव भी है,
जीवन कोई उत्सव भी है,जीवन एक परीक्षा भी है,कभी हँसी के फूल खिलाता,कभी अश्रु की भाषा भी है। कभी सुबह…
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साहित्य
एक सपना जो कभी हक़ीक़त होगा
सपने मे मैंने मृत्यु को करीब से देखा,कफ़न ओढ़ा अपना तन जलते देखा,खड़े थे लोग हाथ बांधे एक पंक्ति जैसे,कुछ…
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साहित्य
प्राकृतिक आपदा
प्राकृतिक आपदा है तबाही हैइंसान के पापों की गवाही है उजड़े हो चमन की बरबादी के गवाह होकुदरती विनाश के…
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साहित्य
संतान नहीं, संस्कार ही वास्तविक विरासत
1. प्रस्तावनामानव जीवन, दाम्पत्य, संतान, संस्कार और मानवता एक-दूसरे के पूरक हैं। भारतीय संस्कृति में विवाह केवल दो व्यक्तियों का…
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साहित्य
प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक
धर्म परायण के लिए, किए नित्य ही काम।इसी हेतु प्रभु राम का,जन्म अयोध्या धाम।जिनके पुण्य प्रताप से, हनुमत करते काज,राम…
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साहित्य
परिवार
परिवार, जहाँ सुख-दुख का है मिश्रणसुना जाता है ,जहाँ सबका मनअनुशासन का होता है,बखूबी पालनकठोरता मे भी निकले मृदु वचन…
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साहित्य
प्यार लुटाते रहिए -गीतिका
ग़म की दौलत को ज़माने से छिपाते रहियेदर्द के साज को चुपचाप बजाते रहिये रात भर नींद का दरवाजा खुले…
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साहित्य
कविता – वीर रस
खोज के बीज पैदा हो गये खड़ावदा की धरती परमन करता फूल चढ़ा दूँ ग्राम पंचायत की अर्थी परबहुत से…
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साहित्य
मैं तो बस लुटता आया
मैं तो बस लुटता ही आयसाम्राज्य नहीं बनवास मिलाजंगल का आवास मिलामाता का परिहास मिलाजनता का उपवास मिलातब से मैं…
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साहित्य
ज़रा परदा हटा दे श्याम
ज़रा परदा हटा दे श्याम, तेरा दीदार हो जाए,मेरे सूने पड़े दिल में, खुशी की बहार हो जाए॥ तेरी यादों…
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