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  • मधुरिम भोर

    मुर्गा ने बोला कूकडूॅं कू ,देखो हुआ मधुरिम भोर ।पौ फटते चुचुहिया बोली ,होत प्रात खग के शोर ।।मधुरिम बेला…

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  • इंसानियत

    मोहल्ले की दीवार पर चिपकाएक बड़ा सा कागज, सबको दिखा था।उस पर कुछ लिखा था।आम आदमी हैरत सेउसे देख रहा…

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  • लिखता हूं, मिटाता हूं,

    लिखता हूँ, मिटाता हूँ — रोज़ एक नई लकीर बनाता हूँ,मेरे घर की टूटी दीवार को मैं रोज़ गिराता और…

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  • शबरी की राहों में राम आये

    शिवरीनारायण के घाट पे,तीन नदियाँ मिल गए,राम नाम गाती लहरें —कब राम मेरे घर आये शबरी रोज जपती रहती,बेर चुनती…

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  • कविता – बाजार और महंगाई

    खूब सजा दिख रहा है आज बाजार,अबकी बार तो, खूब रहेगा ये गुलजार‌।देखो सभी ओर, लगी हुई है रेलम-पेल,अरे! किसी…

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  • परमप्राज्ञ

    परमप्राज्ञ की दृष्टि में, जग का हर रूप समान,नहीं वहाँ कोई भेदभाव, न ऊँच-नीच, न मान।परमप्राज्ञ के नेत्रों से, बहता…

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  • समाधि पाद सूत्र– २१

    तीव्रसंवेगानामासन्नः । तीव्रसंवेगानाम्= जिनके साधन की गति तीव्र है, उनकी {निर्बीज समाधि} आसन्नः= शीघ्र {सिद्ध} होती है । अनुवाद– जिनके…

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  • समाधि पाद सूत्र– २०

    श्रद्धावीर्यस्मृतिसमाधिप्रज्ञापूर्वक इतरेषाम । इतरेषाम्= दूसरे साधकों का {निरोधरूप योग} श्रद्धावीर्यस्मृतिसमाधिप्रज्ञापूर्वकः= श्रद्धा, वीर्य, स्मृति, समाधि और प्रज्ञापूर्वक {क्रम से} सिद्ध होता…

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  • अभी प्यास बाकी है…

    अभी इंतज़ार तेरा बाकी है,जो मेरी आँखों को सुकून दे सके —वो प्यास अभी बाकी है। पूरा घर खामोश है,पर…

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  • सुकून मिले जिंदगी को

    सुकून मिले जिंदगी कोथोड़ा आराम भी मिले।मेरी शाम को ढलने सेपहले पहचान भी मिले।।हालत है मेरे, जिसहिसाब से,उम्र को उम्मीद…

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