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  • हिन्दू अधर्म से डरते हैं |

    हिन्दू अधर्म से डरते हैं |वे सोच सुपावन रखते हैं ||यह देश सभी धर्मों का है |सम्मान सभी का करते…

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  • इजहार

    इजहार करना,सबसे कठिन रहा मेरावर्षो तक प्रयासरत रहा,मन मेरामालूम था सारी बाते,मुझे उनकीफिर भी मन,खामोशी मे रहा मेरा । भय…

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  • मेरा हर शब्द कविता है….

    विषय- दर्दविधा- कविताशीर्षक- तो ही मैं फिर समझूँगी मेरे इस कुछ पल लिखने से,गर कोई सुकूँ को पाता है। इन्हे…

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  • सिंह कन्ध जो श्याम सलोने हैं

    सिया, राम- लक्ष्मण संग वन मेंचलते थक कर विश्राम कर रहे थे,वटवृक्ष तले शीतल छाया में बैठे,रघुबीर अगले पथ के…

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  • गरमी बेजा उबरानी

    संजा आत देर से बेजा,थकी दुपहरिया जात नैया।सूरज इतई पे डारे डेरा,खूब कर रओ मनमानी। अबकी गरमी बेजा उबरानी। तन…

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  • नारी की व्यथा

    विषय- नारी सशक्तिकरणविधा- कविता मैं नारी हूँ ,सबकी प्यारी हूँ,ये दुनिया मैंने सवारी हूँ,मैं जननी हूँ,फिर क्यो दुखों की मारी…

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  • मेरे राम।। तेरे राम।। सबके राम

    राम नाम से ऐसी प्रीती हमको हो गई है।अपने प्रियतम के प्रेम में जैसे ये दुनिया खो गई है।प्रिय, प्रियतम…

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  • जानकी नवमी

    राजा जनक जान थी जानकी ,विधि का विधान थी जानकी ,जनकपुर की अरमान जानकी ,बिहारी नारी महान थी जानकी ।जिस…

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  • नारी केवल प्यार नहीं

    विषय- नरिसशक्ति करणविधा- कविता नारी केवल प्यार नहीं।नारी बस श्रृंगार नहीं।ये दुनिया की वो शक्ति है,जिसका पारावार नहीं। मानस देवी…

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  • विरह

    प्रभु-सुमिरण से दूर हुआ हूँ, विरह मन को सूना कर गया।नाम बिना यह जीवन, विरह का बंजर बनकर रह गया।…

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