Uncategorized

  • शबरी की राहों में राम आये

    शिवरीनारायण के घाट पे,तीन नदियाँ मिल गए,राम नाम गाती लहरें —कब राम मेरे घर आये शबरी रोज जपती रहती,बेर चुनती…

    Read More »
  • कविता – बाजार और महंगाई

    खूब सजा दिख रहा है आज बाजार,अबकी बार तो, खूब रहेगा ये गुलजार‌।देखो सभी ओर, लगी हुई है रेलम-पेल,अरे! किसी…

    Read More »
  • परमप्राज्ञ

    परमप्राज्ञ की दृष्टि में, जग का हर रूप समान,नहीं वहाँ कोई भेदभाव, न ऊँच-नीच, न मान।परमप्राज्ञ के नेत्रों से, बहता…

    Read More »
  • समाधि पाद सूत्र– २१

    तीव्रसंवेगानामासन्नः । तीव्रसंवेगानाम्= जिनके साधन की गति तीव्र है, उनकी {निर्बीज समाधि} आसन्नः= शीघ्र {सिद्ध} होती है । अनुवाद– जिनके…

    Read More »
  • समाधि पाद सूत्र– २०

    श्रद्धावीर्यस्मृतिसमाधिप्रज्ञापूर्वक इतरेषाम । इतरेषाम्= दूसरे साधकों का {निरोधरूप योग} श्रद्धावीर्यस्मृतिसमाधिप्रज्ञापूर्वकः= श्रद्धा, वीर्य, स्मृति, समाधि और प्रज्ञापूर्वक {क्रम से} सिद्ध होता…

    Read More »
  • अभी प्यास बाकी है…

    अभी इंतज़ार तेरा बाकी है,जो मेरी आँखों को सुकून दे सके —वो प्यास अभी बाकी है। पूरा घर खामोश है,पर…

    Read More »
  • सुकून मिले जिंदगी को

    सुकून मिले जिंदगी कोथोड़ा आराम भी मिले।मेरी शाम को ढलने सेपहले पहचान भी मिले।।हालत है मेरे, जिसहिसाब से,उम्र को उम्मीद…

    Read More »
  • ज़िद है, अब ज़िद से

    ज़िद है, अब ज़िद से,ख़ुद को हारने नहीं देंगे।समय की रफ़्तार को भीख़ुद से आगे निकलने नहीं देंगे। वक़्त ने…

    Read More »
  • कपटी धोखेबाज जमाना

    यह कपटी धोखेबाज जमाना,तुम भी बचकर सदा ही रहना। गिरने वाले को ओर गिराते हैं,एक दूजे के नहीं सुख सहते…

    Read More »
  • वन संरक्षण

    कितनी अनमोल है,पेड़ पौधों की ये गूंज।जिम्मेदारी समझो अपनी,आँखें न मूंद।पेड़ लगाओ,पेड़ बचाओ,यूं न कटाओ,यूं न हटाओ।पेड़ पौधों की ये…

    Read More »