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  • गजल

    काफिया —अन की बंदिशरफीद —ढूॅंढ़ता हूॅं मैं।बहर -2122–2222–2122-2=24मात्रा प्यार कान्हा से अपनापन ढूँढ़ता हूँ मैं,प्रेम रिश्तों में प्रिय बंधनढूॅंढ़ता हूॅं…

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  • माँ के अरघा {जंघा} पर नही रखें सर्प

    शिव जी के {गले में सर्प} लिंग में नहीं रखें सर्प ।। द्वादश ज्योतिर्लिंग इसके प्रमाण ।। ‘।। गतानुगतिकोलोकः ।।…

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  • खड़ावदा की पुकार

    आज अपना अस्तित्व मिटाने के लिए नहीं, अपने पास कोई स्थान,अपने गांव की धरती की धूमिल होती पहचान।आखिर कब तक…

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  • संस्कार और आत्मा का सफर

    आत्मा अजर-अमर ‌‌पुनर्जन्म में भी गुण-सूत्र न जाएं बिखरकैसे भी परिवार में हो पुनर्जन्म अच्छे-बुरे गुण-सूत्रमानव जीवन में अपने अस्तित्व…

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  • गज़ल – कभी तुम याद न आना

    वक्त गुजरा है जो मेरा, कभी तुम याद न आना,बिछड़ गया हूं मैं उससे, कभी तुम याद न आना। तेज…

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  • यौवन को ठेंगा दिखा गई

    जवानी आकर चली गईजर्जर काया बना गईदुविधा सुविधा के झूले मेंईंर्ष्या द्वैष की आग जलातन बदन को झुलसा गईतपन डाह…

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  • सत्

    चारों ओर विराजित जग में,सत्य सनातन रमा हुआ है।रोम-रोम, कण-कण में छाया,ग्रह, नक्षत्र, तारों को छुआ है। दशों दिशा में…

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  • विश्व बाल श्रम निषेध दिवस

    एक बात बोलूं साहेब,भले आज हम बाल श्रम के खिलाफ है। लेकिन आज के बच्चे समय से पहले कुछ कर…

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  • बाल श्रम

    अवसर- विश्व बालश्रम् दिवस मुफलिसी की बेगज़ब ये कैसी बेबसी हैखेलने खाने की उम्र मे कमाने की मजबूरी है तरक्की…

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  • प्रकृति का संतुलन आवश्यक क्यों है ?

    किसी भी वस्तु को निरंतर चलायमान रखने के लिए संतुलन का होना अनिवार्य हो जाता है , क्योंकि संतुलन खोने…

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